शुक्रवार, सितंबर 11, 2009 13:27s

चंद्रयान: सफल या असफल?

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भारत की चांद छूने की महत्वाकांक्षी परियोजना चंद्रयान मिशन की यात्रा समाप्त हो गई है लेकिन सवाल यह कि समय से पहले खत्म होकर यह मिशन सफल रहा या फिर असफल। अगर इसरो की मानें तो इसने सभी कामों को पिछले दस महीनों के अंतरिक्ष विचरण के दौरान सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया है। चंद्रयान दो साल की अपनी निर्धारित मिशन अवधि को पूरा करने में नाकाम रहा, जो इसरो के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

चंद्रयान-1 के साथ भेजे गए 11 पे-लोड में से 5 भारतीय व 6 विदेशी हैं। प्रक्षेपण के 312 दिन बाद चंद्रयान-1 से इसरो का संपर्क 29 अगस्त देर रात 1.30 बजे अचानक टूट गया और उसके बाद से चंद्रयान कहां है, इसकी कोई जानकारी नहीं है।

इसरो वैज्ञानिकों के निरंतर प्रयासों के बाद भी उससे न तो कोई आंकड़ा प्राप्त किया जा सका और न ही कोई संदेश भेजा जा सका। इसरो के मुताबिक शुक्रवार देर रात 1:30 बजे अचानक चंद्रयान का सभी 11 अंतरराष्ट्रीय भू-केन्द्रों से रेडियो सम्पर्क टूट गया और सिग्नल प्राप्त होने बन्द हो गए। रेडियो सम्पर्क टूटने के पहले 12 बजकर 25 मिनट तक बैंगलुरू के करीब ब्याललू के डीप स्पेस नेटवर्क में चंद्रयान प्रथम से आंकड़े मिल रहे थे।

प्रक्षेपण के 10 महीने बाद ही समाप्ति के करीब पहुंच चुके चंद्रयान-1 के अंत की शुरुआत तो चार महीने पहले ही 26 अप्रैल को हो गई थी, जब यान के स्टार सेंसर में खराबी के बाद अत्यधिक गर्मी के कारण एक बस मैनेजमेंट यूनिट फेल हो गया था।

हालांकि, वैज्ञानिकों के तकनीकी जुगाड़ के सहारे तब मिशन बच गया था। लेकिन तभी से अनुमान लगाया जाने लगा था कि चंद्रयान-1 दो सालों की अपनी निर्धारित अवधि पूरा नहीं कर पाएगा। अगर इसरो की मानें तो चंद्रयान-1 ने तकनीकी तौर पर अपना 100 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है जबकि मिशन के निर्धारित 90 से 95 प्रतिशत उद्देश्यों को भी पूरा कर लिया गया है। यही कारण हैं कि संपर्क टूट जाने से वैज्ञानिक निराश नहीं हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रयान-1 सफल है लेकिन सवाल यह रहता है कि अगर इसमिशन को 2 साल तक रखना था तो फिर यह समय से पहले समाप्त होने के बावजूद सफल कैसे है।

इसरो ने यह तो कबूल कर लिया है कि चन्द्र मिशन में आई खराबी की वजह उनकी भूल थी। उन्होंने चांद की सतह के तापमान की सही तरह से गणना नहीं की। हम आशा करते हैं कि इसरो इस गलती से सीख लेकर चंद्रयान-2 में यह गलती नहीं दोहराएगा और दुनिया को दिखा देगा कि भारत किसी से कम नहीं है।

चंद्रयान-1 का सफर

  • 22 अक्टूबर, 08 : श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी सी-11 से प्रक्षेपण।

  • 26 अक्टूबर, 08 : गहन अंतरिक्ष में प्रवेश।

  • 8 नवम्बर, 08 : चांद की कक्षा में प्रवेश।

  • 12 नवम्बर, 08 : कक्षीय दूरी 100 किमी हुई।

  • 14 नवम्बर, 08 : चांद पर पहुंचा भारतीय तिरंगा।

  • 26 अप्रेल, 09: स्टार सेंसर में खराबी की जानकारी।

  • 19 मई, 09: कक्षीय दूरी 100 किमी से बढ़ाकर 200 किमी की गई।

  • 22 जुलाई, 09: सूर्यग्रहण के दौरान पृथ्वी पर पड़ने वाली चंद्र छाया की तस्वीरें उतारीं।

  • 21 अगस्त, 09 : नासा के अंतरिक्ष यान एलआरओ के साथ मिलकर बाई-स्टैटिक एक्सपेरिमेंट को अंजाम दिया।

  • 29 अगस्त, 09 : रेडियो संपर्क टूटा, मिशन समाप्त।

पोस्टेड यासिर मुश्ताक at 13:27s     2 कमेंट्स

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पोस्टेड बी sharad saxena

आपका ये टॉपिक अभी तक IBN7 ब्लॉग मे नही आ पाया हे जिसको मैं पेज से क्लिक करके देखा जा सके ...

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पोस्टेड बी sharad saxena

जनाब यासिर मुश्ताक साहेब, तहेदिल से शुक्रिया की बहुत डीनो बाद IBN7 ब्लॉग पर कुछ नया टॉपिक आया जो एक खुशनुमा ताज़गी का एहसास करता हे वरना वही दो कोडी के मुद्दे ....ये पार्टी वो पार्टी, फलना धर्म, अमुक जाति, जिन्ना साहेब या सेकड़ो साल पुराने इतिहास को कब्रो से खोद कर आज के माहॉल की प्लास्टिक सर्जरी देने की कोशिश.......आपकी कोशिश मुझे बहुत अच्छी लगी, आख़िर हमारे न्यूज़ चॅनेल्स को साइन्स की ख़बरे बताने मे साँप क्यो सूंघ जाता हे जबकि किसी भी देश की उन्नति का सबसे बड़ा आधार साइन्स ही हे ना की इतिहास के कुरेदे हुए पन्ने जो समाज मे सिर्फ़ और सिर्फ़ जहर ही घोलते हे.....अच्छा लगता हे की मीडीया मे आपके जैसे कुछ लोग(बेशक गिने चुने ही सही) मोजूद हे!!!! ...

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