गुरुवार, अक्टूबर 15, 2009 18:16s

चांद पर पानी से इसरो के आलोचक चुप

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जब अगस्त महीने की 29 तारीख को चंद्रयान-1 से रेडियो सम्पर्क टूटा और चंद्रयान मिशन की यात्रा समाप्त हुई तो सभी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की लेकिन जब नासा ने यह खुलासा किया की चांद पर पानी मौजूद है और यह पता लगाना संभव हुआ कि चंद्रयान-1 से तो उन सभी बुलंद आवाजों को जवाब मिल गया कि चंद्रयान-1 एक सफल अभियान है।

अभी तक कोई भी अभियान सकारात्मक रूप से पानी की मौजूदगी को साबित नहीं कर पाया था। चंद्र सतह पर पानी का पता लगाना चंद्रयान-1 अभियान का एक प्रमुख मकसद था जबकि चांद के इलाके और खनिजों मानचित्रण भी मिशन के प्रमुख उद्देश्यों में से एक थे।

गौरतलब है कि चंद्रयान-1 के साथ भेजे गए नासा के उपकरण मून मिनरलोजी मैपर (एम-3) ने चंद्रमा पर परावर्तित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य का पता लगाया जो ऊपरी मिट्टी की पतली परत पर मौजूद सामग्री में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक संबंध का संकेत देता है। चंद्रयान-1 द्वारा भेजे गए आंकड़ों के विश्लेषण के बाद नासा वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर पानी के अस्तित्व की पुष्टि कर दी।

खोज के मुताबिक चांद पर पाया गया कि जल बेहद कम मात्रा में है। साथ ही, किसी झील या तालाब के रूप में नहीं बल्कि वह धूल और चट्टानों के टुकड़ों में मौजूद है। हालांकि इस खोज से वैज्ञानिकों के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं, मसलन वहां पानी के अणु कहां से आए और कहां जा रहे हैं।

दरअसल चांद धरती के किसी भी मरुस्थल से ज्यादा सूखा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि नाभिकीय विखंडन के परिणामस्वरूप चंद्रमा पर चट्टानों और मिट्टी में मौजूद ऑक्सीजन के प्रोटोन्स के रूप में सूर्य द्वारा उत्सर्जित हाइड्रोजन के साथ हुई अंतरक्रिया से पानी बना होगा।

जल कणों की मौजूदगी से अब चंद्रयान-2 अभियान के पूर्व निहित उद्देश्यों में कुछ बदलाव संभव हैं। अभी चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण में लगभग तीन साल का वक्त है और इस दौरान यह देखा जाएगा कि चंद्रयान-1 के प्रयोगों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। चंद्रयान-2 के लिए अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी से काफी प्रस्ताव आए हैं फिलहाल रूस का लैंड रोवर भेजे जाने पर फैसला हुआ है।

अपने आलोचकों को जवाब देते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष माधवन नायर ने कहा कि मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि देश के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 ने चांद की सतह पर जल कणों की मौजूदगी की पुष्टि की है। इस युगांतकारी खोज में भारत के चंद्रयान-1 की अहम भूमिका रही, जिस पर हर-एक भारतीय गर्व कर सकता है।

पोस्टेड यासिर मुश्ताक at 18:16s     0 कमेंट्स

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