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...सिर्फ 10 रुपए महीना वेतन है इनका

Posted on Jun 06, 2009 at 06:48pm IST

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जम्मू। चुनाव खत्म हो चुके हैं और देश की बागडोर अब नई सरकार के हाथ में है। लेकिन जनता की कुछ परेशानियां अब भी अनसुलझी हैं। पेश है जम्मू के एक सिटीज़न जर्नलिस्ट मोहन लाल शर्मा की एक रिपोर्ट जो उन लोगों के हक में बरसों से आवाज़ उठा रहे हैं सरकार के शोषण का शिकार लोगों की। ये वो कर्मचारी हैं जिन्हें सरकारी नौकरी के बदले महज़ 10 रुपए महीना वेतन मिलता है।

पूनम जम्मू के कठुआ इलाके में रहती हैं। उसके तीन बच्चे हैं। पति काम तो करता है लेकिन इतनी आमदनी नहीं होती कि परिवार का खर्च चल सके। ऐसे हालात में 7 साल पहले पूनम ने शिक्षा विभाग में माई यानी चपरासी का काम करना शुरू किया। उम्मीद थी बुरे दिन ख़त्म हो जाएंगे लेकिन अफ़सोस पूनम की नौकरी उसकी ज़िंदगी पर भारी पड़ गयी। वजह है वेतन।

पूनम को अपनी नौकरी के एवज में मिलता है सिर्फ़ 10 रुपए महीना। जी हां, पूरे महीने का वेतन सिर्फ़ दस रुपए। ये कहानी सिर्फ़ पूनम की नहीं है बल्कि शिक्षा विभाग में काम कर रहे लगभग 5000 कर्मचारियों की है।




सरकार ने अपने दफ़्तरों के लिये ही नहीं बल्कि कहीं भी काम करने वालों के लिए न्यूनतम वेतन तय किया है। लेकिन सरकार खुद अपने कर्मचारियों के साथ क्या सुलूक कर रही है ये आप पूनम के बारे में जानकर अंदाज़ लगा चुके होंगे। मोहन लाल शर्मा उन लोगों के हक में बरसों से आवाज़ उठा रहे हैं जो सरकार के शोषण का शिकार हैं।

किसी को भी ये जान कर हैरानी होगी कि किसी सरकारी कर्मचारी को महज़ 10 रुपए महीना वेतन मिलता है। इस सच्चाई से सरकारी अधिकारी ही नहीं जम्मू-कश्मीर के सभी नेता भी जानते हैं लेकिन क्या मजाल कि किसी ने इस बेइंसाफ़ी के खिलाफ़ आवाज़ उठाई हो। गरीब, मजबूर और बेबस लोग इस आस में कई साल से दस रुपए महीना पर काम कर रहे हैं कि एक दिन सरकार उनकी फ़रियाद सुनेगी।

पिछले 20 सालों में कई सरकारें बदल गई लेकिन इन कर्मचारियों के बारे में कभी नही सोचा गया। हर बार इन महिलाओं को धरने- प्रदर्शन के बाद मिलता है तो सिर्फ झूठा आश्वासन। यहां तक की चुनावों के दौरान इन्हीं को वोट बैक के रूप में भी अच्छी तरह से इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इनके वेतन को लेकर आजतक किसी ने भी विधानसभा में आवाज नहीं उठाई।

मोहन लाल शर्मा पिछले 7-8 साल से इन महिलाओं की आवाज अधिकारियों और मंत्रियों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में वो शिक्षा विभाग से भी बात करने गए।

अधिकारी ने कहा कि इस मामले में विचार किया जा रहा है और जल्द ही नए वेतनमान घोषित किए जाएंगे। इतना कम वेतन दे कर काम कराना बंधुआ मज़दूरी से भी बदतर है। मोहन लाल शर्मा सभी से अपील करते हैं कि इस नाइंसाफी को रोकने के लिए अपने स्तर पर आप भी सहयोग करें।

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