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पढ़ें: लोकसभा में पेश आर्थिक सर्वे के मुख्य बिंदु

Posted on Jul 02, 2009 at 01:26pm IST | Updated Jul 02, 2009 at 02:41pm IST

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आज लोकसभा में आर्थिक सर्वे पेश किया। वित्त मंत्री ने माना कि देश के सामने कई चुनौतियां हैं। लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि हमारी अर्थव्यवस्था खासी मजबूत है। उन्होंने बुनियादे ढांचे और कृषि पर जोर देने की बात की है। प्रणब ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर काफी बेहतर स्थिति में है। विनिवेश पर सरकार का खास ध्यान रहेगा। आर्थिक सर्वे में साल 2009-2010 में 25 हजार करोड़ के विनिवेश की बात कही गई है।

वित्त वर्ष 2008-09 के आर्थिक सर्वेक्षण की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

आर्थिक समीक्षा 2008-09 :सार्वजनिक कंपनियों में विनिवेश की सिफारिश

नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2008-09 की आर्थिक समीक्षा के मुख्य बिंदु:

  • गैर सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों को सूचीबद्ध कर उनमें 10 फीसदी तक विनिवेश

  • घाटे में चल रही सार्वजनिक कंपनियों की नीलामी

  • दोहरे कराधान से बचने के लिए लाभांश वितरण कर को युक्ति संगत बनाया जाए

  • सीमा शुल्क छूट पर पुनर्विचार

  • फ्रिंज बेनिफिट टैक्स समाप्त करने की सिफारिश

  • कॉमोडिटी और सेक्युरिटी ट्रांजेक्शन कर को खत्म करने की सिफारिश

  • रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी सीमित कर उसे प्रति परिवार छह से आठ सिलेंडर किया जाए

  • केरोसिन सब्सिडी केवल उन्हीं परिवारों को दी जाए जिनके घर में बिजली और रसोई गैस सिलेंडर नहीं हो

  • ईंधन, खाद्यान्न और उर्वरक सब्सिडी में कटौती

  • बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश सीमा 49 प्रतिशत तक वृद्धि

  • स्वास्थ्य, मौसम बीमा में 100 फीसदी विदेशी निवेश

  • प्रत्येक वर्ष विनिवेश से 25,000 करोड़ रुपये जुटाना

  • लाभ कमाने वाली गैर नवरत्न कंपनियों की 5 से 10 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री

  • आर्थिक समीक्षा 2008-09 में सरकार का कहना है कि निर्धनता की दर में काफी गिरावट हुई है लेकिन कुपोषण की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।

  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, 2005-06 के अनुसार तीन साल से छोटे उम्र के बच्चों में कुपोषण की मात्रा 45.9 फीसदी है जो अब भी बहुत ज्यादा है। इसमें 1998-99 में 47 फीसदी के स्तर से कोई खास कमी नहीं आई है।

आर्थिक समीक्षा 2008-09: प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि

  • प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी। वर्ष 2008-09 में प्रति व्यक्ति आय 17,334 रुपये थी जबकि वर्ष 2007-08 में यह 17,097 रुपये थी।

  • वर्ष 2008-09 के दौरान चावल का उत्पादन 993.7 लाख टन, गेंहू का उत्पादन 776.3 लाख टन, दालों का उत्पादन 141.8 लाख टन, तिलहन का उत्पादन 281 लाख टन और गेहूं का उत्पादन 2,892 लाख टन होने का अनुमान।

  • कच्चा तेल, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद, कोयला, बिजली, सीमेंट और तैयार इस्पात में वर्ष 2008-09 के दौरान 2.7 फीसदी की बढ़ोतरी।

  • देश की अर्थव्यवस्था पर प्रारंभिक चरण में वैश्विक वित्तीय संकट का असर नहीं।

  • वर्ष 2008-09 के दौरान विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का प्रवाह बढ़ा।

  • मार्च 2009 के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार में 252 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि थी।

  • वर्ष 2008-09 में कृर्षि व संबद्ध गतिविधियों में वृद्धि में 1.6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

  • अनुसूचित जाति व जनजाति, अल्पसंख्यकों और विकलांगों के विकास पर विशेष ध्यान।

  • आधारभूत ढांचे के विकास में सुधार।

  • निर्धनता की दर में गिरावट लेकिन कुपोषण की स्थिति गंभीर।

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन देश के 14 राज्यों के 312 चिन्हित जिलों में क्रियान्वित किया जा रहा है।

  • 11वीं पंचवर्षीय योजना में रोजगार के पांच करोड़ 80 लाख अवसर पैदा किए जाएंगें।

  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एकीकृत रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के नाम से एक रेलयात्री प्रणाली चलाए जाने का प्रस्ताव है।

  • सर्वशिक्षा अभियान के तहत अब तक 2.7 लाख से अधिक स्कूल खोले गए।

  • पूंजी बाजार में पुनर्जीवन के संकेत।

आर्थिक समीक्षा 2008-09: कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर में गिरावट

  • आर्थिक समीक्षा 2008-09 के मुताबिक बीते वित्त वर्ष में कृषि एवं संबंधित गतिविधियों के विकास में (संशोधित अनुमान के अनुसार) 1.6 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। वर्ष 2007-08 में कृषि क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सा 2003-04 के 21.7 प्रतिशत की तुलना में 17.8 प्रतिशत रहा।

  • सकल घरेलू उत्पाद में उसका योगदान पिछले वर्षो में घटता जा रहा है। वर्ष 2007-08 में राष्ट्रीय निर्यात में कृषि क्षेत्र का योगदान 12.2 प्रतिशत था। देश में रोजगार में भी लगभग 52 प्रतिशत अंश इसी का है। इसके अलावा खाद्यान एवं चारा प्रदान करने, उद्योग को कच्चे माल की आपूर्ति में भी कृषि क्षेत्र की महत्पवूर्ण भूमिका है।

  • पिछले तीन वर्षो (2005-06 से 2007-08 में) 4.9 प्रतिशत से अधिक की औसत वृद्धि के साथ कृषि क्षेत्र ने समग्र वृद्धि में शानदार योगदान दिया और 2007-08 और 2006-07 में क्रमश: 4.9 और 4.0 प्रतिशत से कम वृद्धि हुई है।

  • इसलिए 2008-09 के निष्पादन की समीक्षा पिछले वर्षो के उच्च आधारों के अनुसार करने की आवश्यकता है। कृषि वृद्धि में तेजी से उतार-चढ़ाव आए हैं तथा यह प्रकृति की अनिश्चिता के कारण भी असुरक्षित है।


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