कर्मचारी नहीं, दाम घटाएं कंपनियां: चिदंबरम
Tue, Nov 18, 2008 at 18:19 , Updated at Wed, Nov 19, 2008 कारोबार सेक्शन
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नई दिल्ली। आर्थिक मंदी की मार से निपटने के लिए सरकार ने उद्योग जगत का दरवाजा खटखटाया है। सरकार चाहती है कि ऑटोमोबाइल कंपनियां, एयरलाइंस और कंस्ट्रक्शन कंपनियां अपने दाम कम करें। इसके बदले में सरकार ने मंदी की मार झेल रही कंपनियों को एक्साइज दर में कटौती का भरोसा जताया। वित्तमंत्री ने विश्वास जताया कि अर्थव्यवस्था की स्थिति में अगले वर्ष तक सुधार आ जाएगा।
दावोस स्थित वर्ल्ड इकोनामिक फोरम के इंडिया इकोनामिक सम्मेलन के अंतिम दिन चिदंबरम ने कहा कि मांग में कमी से निपटने का सबसे बढ़िया तरीका कीमतों में थोड़े समय के लिए कमी करना है।
उन्होंने कहा केवल इसी तरीके से भारतीय कंपनियां वित्तीय हालत ठीक रखने के साथ ही कठिनाई से अर्जित बाजार को बनाए रखकर मेहनती कर्मचारियों का विश्वास कायम रख सकती हैं।
वित्तमंत्री ने कहा कि बैंक कर्ज देने के लिए तैयार हैं लेकिन खरीदार मौजूदा मूल्यों पर खरीदारी के लिए कर्ज नहीं लेना चाहते। चिदंबरम ने उद्योगों से घरों, कारों, दोपहिया वाहनों और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के दाम घटाने को कहा।
वित्तमंत्री ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने करों के बाद भी मुनाफे में 30 प्रतिशत की वृद्धि की है। मुनाफे में वृद्धि जब घटकर 10-12 प्रतिशत रह जाए तो यह चिंता का विषय है।
वित्तमंत्री ने कहा कि आर्थिक अस्थिरता का दौर छह, नौ माह या फिर साल भर में समाप्त हो जाएगा और हम अपनी सामान्य विकास दर हासिल कर लेंगे।
चिदंबरम ने कहा कि औसत उत्पाद शुल्क 16 प्रतिशत से घटाकर 14 फीसदी किया गया है और भी कमी पर वे विचार कर सकते हैं।
वित्त मंत्री के इस बयान पर डीएलएफ के चेयरमैन के पी सिंह का कहना है प्रॉपर्टी की कीमतें पहले ही से कम हो चुकी हैं।































पोस्टे बी saurabh
सरकार ख़ुद तो ब्याज नही घटा ती और ना ही पेट्रोल के क़ीमत घटा थी पर उद्योगपतियो को सालहा देते
रेप्ली टू थिस कमेंट