पीएम ने कहा, आतंकवाद पाक की स्टेट पॉलिसी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्ष्ता में आज यानी मंगलवार को आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर मुख्यमंत्रियों की एक अहम बैठक हुई।
मंगलावार को बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान पर 'युद्धोन्माद भड़काने' का आरोप लगाते हुए कहा कि आतंकवाद पाकिस्तान की स्टेट पॉलिसी बन चुकी है। और साथ ही वो लगातार आतंक को बढ़ावा देने का काम कर रहा है।
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उन्होंने कहा कि आतंकी नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे निपटने के लिए हमें आतंरिक सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए 'समग्र रणनीति' पर अमल और राष्ट्रीयता की सशक्त भावना को जगाने की जरूरत है।
आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि पाकिस्तान के युद्धोन्माद भड़काने के बावजूद भारत अडिग रहा और उसकी एकता बरकरार रही।
उन्होंने कहा- परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं और वे चुनौतीपूर्ण हैं भी लेकिन हमारे नियंत्रण से बाहर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बाहरी और आंतरिक खतरों का सामना करने के लिए राष्ट्रवाद की सशक्त भावना का पैदा होना आवश्यक है।
वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के विदेश सचिव ने प्रधानमंत्री के बयान के बाद कहा कि भारत ने कोई सबूत नहीं दिए हैं। भारत ने सबूत नहीं सूचना दिया है। सूचनाओं पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। सचिव का कहना है कि भारत पाकिस्तान को विश्व समुदाय से अलग-थलग करने के लिए राजनीतिक स्तर पर कोशिश कर रहा है।
सचिव ने कहा भारत के प्रधानमंत्री धीरे-धीरे युद्ध का माहौल बना रहे हैं। साथ ही कहा है कि भारत के पीएम ने बयान देकर दोनों देश के बीच का माहौल को बिगाड़ा है। यानी पाकिस्तान कार्रवाई करने के बजाय फिर गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा-दुर्भाग्यवश हम अपने पड़ोसियों का चयन नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि मुंबई के आतंकवादी हमलों को स्पष्ट रूप से पाकिस्तान से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था और आतंकवादियों ने जिस तरह इस हमले को अंजाम दिया उससे पता चलता है कि इसे पाकिस्तानी सरकार का समर्थन हासिल था।
उन्होंने कहा कि साल भर से सुरक्षा के हालात ज्यादा जटिल हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने ये भी स्वीकार किया कि मुंबई में हुए हमले सुरक्षा खामियों का नतीजा थे। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला करने के लिए समुद्री मार्ग का प्रयोग किया और हमारी पैनी नजरों से बच निकले।
उन्होंने माना कि बांग्लादेश और नेपाल से जुड़ी सीमा से भी घुसपैठ हो रही है
इस बैठक में चरमपंथ से लड़ने की रणनीति, ख़ुफिया जानकारी के आदान-प्रदान की व्यवस्था को मज़बूत करने, सीमा और तटीय सीमाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
इसके अलावा उन सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इमारतों, भवनों, उपक्रमों की सुरक्षा पर भी विशेष रूप से चर्चा हुई।
नया पदभार संभालने के बाद गृहमंत्री और पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने सुरक्षा के मुद्दे पर इस स्तर की पहली बार बैठक बुलाई। मुंबई हमलों के बाद देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफ़िया तंत्र के कामकाज के तरीके पर भी बहुत सवाल उठाए गए थे। इसके चलते ही हमलों के बाद नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल को इस्तीफ़ा देना पड़ा था।
उधर मुंबई आतंकी हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा घेराबंदी से परेशान पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार अपने राजनीतिक मकसद साधने के वास्ते मुंबई हमलों का इस्तेमाल कर रही है।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जनरदारी ने अमरीकी विदेश विभाग में दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के सहायक मंत्री रिचर्ड बाउचर को अपनी सफाई देते हुए सोमवार को यह आरोप लगाया।
जरदारी ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान का संकल्प दोहराते हुये श्री बाउचर से कहा कि पाकिस्तान ने मुंबई हमलों की जांच में भारत को हर संभव सहयोग की पेशकश की थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार मुंबई हमलों का पाकिस्तान के विरद्ध राजनीतिक हित साधने के लिये इस्तेमाल कर रही है।
ग़ौरतलब है कि 26 नवंबर को मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद से सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने गंभीर रुख अख़्तियार किया है।
करो मनमोहांजी और चर्चा करो वैसे भी और कुच्छ आप लोग कर नही सकते. अब तो सारे हिंदुस्तनियो की कसोती































पोस्टे बी jay
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