करगिल घोटालाः सीबीआई की कछुआ चाल पर कोर्ट सख्त
Tue, Jan 06, 2009 at 19:58 , Updated at Tue, Jan 06, 2009 देश सेक्शन
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के बार-बार निर्देशों के बावजूद करगिल घोटाले की जांच में सीबीआई अपने ढुलमुल रवैए पर कायम है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सीबीआई को निर्देश दिया है कि वो 4 हफ्तों के अंदर कोर्ट को ये बताए कि सीबीआई की जांच कहां तक पहुंची है।
सीबीआई को ये भी बताना होगा कि सेना में कौन-कौन से आला अधिकारी संदेह के घेरे में हैं और उनके खिलाफ कोई केस दर्ज किया गया है या नहीं। 1999 में करगिल युद्ध के दौरान सेना ने 2 हजार करोड़ रुपए के हथियार और दूसरी चीजें खरीदी थीं लेकिन सीएजी की रिपोर्ट ने इस मामले में हेरा-फेरी की बात कही थी। आप हैरान हो जाएंगे ये जानकर कि पिछले 7 सालों से सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है लेकिन अभी तक नतीजा सिफर रहा है।
एक याचिकाकर्ता ने साल 2000 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि करगिल युद्ध के दौरान सेना ने जो खरीदारी की उसमें नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया। सीएजी की रिपोर्ट में भी चौंकाने वाली बात ये सामने आई कि उस दौरान जिन हथियारों की खरीदारी की गई वो बिल्कुल बेकार हैं। साथ ही जवानों के लिए खरीदे गए जूते और दस्ताने भी उनके किसी काम के नहीं थे।
ये खरीदारी इटली, स्पेन और रूस जैसे देशों से की गई थी। सीएजी के मुताबिक सेना के अधिकारियों ने ये खरीदारी सरकार से इजाजत लिए बिना ही कर ली थी। सेना के 9 ऐसे अधिकारी हैं जिनके खिलाफ केस बनता है लेकिन सीबीआई ने अबतक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है क्योंकि ये मामला आर्मी और देश की सुरक्षा से जुड़ा है। कोर्ट को लगता है कि अगर यह घोटाला पब्लिक हो गया तो ये सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में इस ममाले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी यह कहना मुश्किल है।






























पोस्टे बी Manikant
कारगिल जाँच का सी बी आई रवैया सिफ़र रहा है और सिफ़र ही रहेगा क्यों की ये लोगो का भी
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