सामने आया कारपोरेट इंडिया का सबसे बड़ा घोटाला

TimeWed, Jan 07, 2009 at 13:08 , Updated at Wed, Jan 07, 2009 कारोबार सेक्शन

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रामलिंगा राजू के इस्तीफे की खबर के बाद सत्यम के शेयरों में 77 फीसदी तक की गिरावट हुई।

रामलिंगा राजू के इस्तीफे की खबर के बाद सत्यम के शेयरों में 77 फीसदी तक की गिरावट हुई।

    

हैदराबाद।आईटी की दिग्गज कंपनी सत्यम कंप्यूटर्स में भारत के सबसे बड़े कारपोरेट घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। कंपनी के चेयरमैन राजू रामलिंगा ने घोटाले की बात कबूल करते हुए इस्तीफा दे दिया है। राजू ने माना कि कंपनी की बैलेंस शीट में गलत हिसाब दिखाया जा रहा था। सत्यम कंप्यूटर्स भारत की 5 सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक है। इस फर्जीवाड़े की खबर से शेयर बाजार में भूचाल आ गया और सेंसेक्स 750 प्वाइंट गिर गया।

राजू ने कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। फर्जीवाड़े की खबर मिलते ही कंपनी मामलों के मंत्री प्रेमचंद गुप्ता ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच स्पेशल फ्रॉड इन्वेशटिगेशन ऑफिस करेगा।

रामलिंगा राजू के इस्तीफे की खबर के बाद सत्यम के शेयरों में 77 फीसदी तक की गिरावट हुई। सुबह सत्यम का जो शेयर 170 रुपये पर था वो शाम होते-होते 40 रुपये का हो गया। कंपनी के बोर्ड को लिखे पत्र में राजू ने बैलेंस शीट की पूरी जानकारी के साथ घोटाले की बात स्वीकार की है। राजू ने शेयरधारकों से माफी भी मांगी है। इस खबर से उद्योग जगत में कोहराम मच गया।

सत्यम पिछले कई महीने से अपने कुछ फैसलों के कारण विवादों में थी। चेयरमैन राजू ने फर्ज़ीवाडे के लिए अपनी गलती स्वीकार की है और कहा है कि वो किसी भी कानूनी कार्रवाई को स्वीकार करेंगे। आईबीएन 7 को मिली जानकारी के मुताबिक हैदराबाद पुलिस ने राजू के पीछे सादी वर्दी में पुलिसवालों को लगा दिया है ताकि वे कहीं भाग कर न जा पाएं।

सत्यम कंप्यूटर्स में 5,000 करोड़ रुपये का घोटाला अचानक सामने नहीं आया। कुछ दिनों पहले ही विश्व बैंक ने सत्यम से अपना करार तोड़ लिया था। दरअसल सत्यम कंपनी के चेयरमैन ने कई ऐसे फैसले लिए जिससे कंपनी को कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि आरोप ये है कि उन्होंने अपने बेटे को फायदा पहुंचाने की कोशिश की। राजू ने खुद माना है कि पिछले कई साल से सत्यम के जो नतीजे दिखाए जा रहे थे उन्हें बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा था। ये फर्जीवाड़ा 1 अरब डॉलर से ज़्यादा का है। राजू ने बीएसई को बताया कि कंपनी ने अपने खातों में 5 हज़ार 40 करोड़ रुपए ग़लत तरीके से दिखाए। इतना ही नहीं इस पर 376 करोड़ रुपए का ब्याज भी दिखाया गया जो जाहिर है था ही नहीं।

सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता। राजू के खिलाफ सत्यम के पैसे से अपने बेटों की कंपनियों को मदद देने के आरोप लगे। यहीं से सत्यम और रामलिंगा राजू के बुरे दिन शुरू हुए। अपने प्रमोटर और चेयरमैन रामालिंगा राजू के परिवार की 2 कंपनियों मेटास इंफ्रा और मेटास प्रॉपर्टीज को 1.6 अरब डॉलर यानी लगभग 8,000 करोड़ में खरीदने की घोषणा कर सत्यम कम्प्यूटर सविर्सेज ने शेयरधारकों की नाराजगी मोल ली। मेटास खरीदने के फैसले पर सत्यम को आखिरकार वही करना पड़ा, जो निवेशक चाहते थे। 12 घंटों के भीतर सत्यम को ये फैसला बदलना पड़ा। इस ऐलान के बाद कंपनी को लचर कॉरपोरेट प्रशासन के आरोपों पर सफाई भी देनी पड़ी।

इससे पहले विश्व बैंक ने सत्यम कंपनी के साथ करार ख़त्म करने की घोषणा की थी। सत्यम अब 8 साल तक वर्ल्ड बैंक को अपनी सेवाएं नहीं मुहैया करा सकेगी। सत्यम ने वर्ल्ड बैंक को 2003 में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। 2 साल के बाद घूसखोरी का मामला सामने आया था। 2007 में वर्ल्ड बैंक ने अपनी जांच में पाया कि बैंक के वाइस प्रेजिडेंट मोहम्मद हुसैन ने कम कीमतों में सत्यम के एडीआर के बदले 10 करोड़ डॉलर का परचेज ऑर्डर दिया था।

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